एक कहानी जो आपको डर से लड़ने के लिए प्रोसाहित करेगा।
" डर से लड़ो डरो नहीं "
एक बार एक आदमी अपने बेटे को दोनों हाथों से खेलने के लिए लेकर एक उड़ानभरी दीवार पर जा रहा था। वह उसे उस दीवार पर चढ़ा देना चाहता था, लेकिन उसके बेटे को डर था उस दीवार को चढ़ने से।
पिता ने अपने बेटे को अपनी बाहों में ले लिया और कहा, "बेटा, डरने की कोई बात नहीं है। अगर तुम यह करने के लिए तैयार हो तो देखो, तुम यह कर सकते हो।"
बेटे ने अपने पिता की बात मानी और अपने पैरों को दीवार पर रखा। वह धीरे-धीरे ऊपर चढ़ता गया और अंत में उसने उस दीवार को पूरी तरह से चढ़ लिया।
उसके पिता ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और उसने एक नया अभियान शुरू किया। वह उसके साथ हर दिन उस दीवार पर चढ़ने लगा और उसने उसे पूरी तरह से मास्टर कर लिया।
यह कहानी हमें बताती है कि जब हम किसी नए काम को शुरू करते हैं, तो उसमें कुछ परेशानियां और मुश्किलें हो सकती हैं। लेकिन हम अपने सपनों के लिए अपनी मेहनत जारी रखते हुए, हम उन मुश्किलों से निपट सकते हैं और अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। इसके लिए, हमें अपने सपनों के लिए सक्रिय रहना और कभी हार नहीं मानना चाहिए।
अक्सर लोग मुश्किलों से डर जाते हैं और अपने सपनों को छोड़ देते हैं। इससे हमें न केवल आगे नहीं बढ़ने का मौका मिलता है, बल्कि हमें अपनी खुशियों और सफलताओं से वंचित कर दिया जाता है।
इसलिए, हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करना चाहिए और कभी हार नहीं मानना चाहिए। हम अपने जीवन में चुनौतियों का सामना करेंगे, लेकिन हमें इन चुनौतियों से नहीं डरना चाहिए, बल्कि उनसे सीखना चाहिए।
इसी तरह से, जैसे कि उस बेटे ने अपने पिता के प्रोत्साहन से अपने लक्ष्य तक पहुंचा, हमें भी अपने लक्ष्य के लिए एक दृढ़ संकल्प बनाना चाहिए और मेहनत करना चाहिए ताकि हम अपने सपनों को पूरा कर सकें।


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